कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने उजागर किए प्रदेश की भर्तियों में गैर हरियाणवी युवाओं के चयन के आंकड़े

हरियाणा की सरकारी भर्तियों में बाहरी राज्यों के युवाओं को प्राथमिकता हरियाणा की सरकारी नौकरियों में प्रदेश से बाहर के...

Created at: 10/10/2023, 9:25:50 PM
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हरियाणा की सरकारी भर्तियों में बाहरी राज्यों के युवाओं को प्राथमिकता

हरियाणा की सरकारी नौकरियों में प्रदेश से बाहर के युवाओं को महत्व देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने भाजपा-जजपा गठबंधन पर सवाल उठाए हैं। ऐसी तमाम नौकरियों का ब्योरा देते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा बेरोजगारी में नंबर वन और औद्योगिक निवेश में सबसे नीचे पहुंच चुका है। संसद में पेश केंद्रीय श्रम मंत्रालय तथा रिजर्व बैंक आफ इंडिया की दो अलग-अलग रिपोर्ट मीडिया से साझा करते हुए दीपेंद्र ने कहा कि हरियाणा के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस कार्यालय में एनएसयूआइ के प्रदेश अध्यक्ष अविनाश यादव (रेवाड़ी) और मजदूर कामगार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तनवीर को कार्यभार ग्रहण कराने के बाद सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने गठबंधन सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि अविनाश यादव किसी भी छात्र संगठन के ऐसे पहले प्रदेश अध्यक्ष हैं, जो दक्षिण हरियाणा के रहने वाले हैं। दीपेंद्र ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री रामेश्वर तेली द्वारा सदन में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल सीएमआइ की बेरोजगारी की रिपोर्ट को नहीं मानते, लेकिन केंद्र सरकार के मंत्री ने सदन में आन रिकार्ड जानकारी दी है कि जिस हरियाणा में 2013-14 में सिर्फ 2.9 प्रतिशत बेरोजगारी थी, अब 2023-24 में नौ प्रतिशत हो चुकी है। अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल को जवाब देना चाहिए कि क्या केंद्र सरकार के मंत्री की रिपोर्ट झूठी है। दीपेंद्र हुड्डा ने आरबीआइ की रिपोर्ट के आधार पर बताया कि 21 राज्यों के विश्लेषण में हरियाणा निचले तीन राज्यों में शामिल हो चुका है। 2012-13 में हरियाणा औद्योगिक निवेश में नंबर वन राज्य था। अब युवाओं के विदेश पलायन, बेरोजगारी, गरीबी, डिप्रेशन, नशा और अपराध ने हरियाणा को निवेश के लिहाज से सबसे निचले पायदान पर धकेल दिया है। प्रदेश में सरकारी नौकरियों के अवसर खत्म कर उन्हें अनुबंधित अथवा कच्ची नौकरियों में बदल दिया गया है। सेना में हर साल हरियाणा से 5500 युवा नौकरी के लिए जाते थे, मगर अग्निवीर योजना के आने के बाद सिर्फ 932 की नौकरी लगी है, इनमें भी 214 ही पक्के होंगे, बाकी सब घर वापस आ जाएंगे।

 

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