मुख्मयंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं
हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के विभागों में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। पुलिस विभाग के 373 जांच अधिकारियों के निलंबन के आदेश देने के बाद अनिल विज अब स्वास्थ्य विभाग में भी धमाका करने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। दो दिन पहले अंबाला में आयोजित एक कार्यक्रम में अनिल विज ने अधिकारियों को सुधरने की नसीहत देते हुए इस धमाके के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी के हस्तक्षेप से नाराज अनिल विज किसी भी समय मुख्मयंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं।अनिल विज इस बात से नाराज हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठतम अधिकारी ने उन्हें भरोसे में लिए बिना स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक ली है, जिसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव जी अनुपमा भी शामिल हुई। अनिल विज को यह बात बहुत ही नागवार गुजरी, जिसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की फाइलों को मंजूर अथवा नामंजूर करना बंद कर दिया है। बताया जाता है कि अनिल विज के कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग के कामों की फाइलों के ढेर लग गए हैं। इन फाइलों को अनिल विज न तो देख रहे हैं और न ही किसी तरह की कोई संस्तुति कर रहे हैं। अनिल विज के इस स्टैंड को देखते हुए अब उनके स्टाफ ने फाइलें लानी ही बंद कर दी और उनके बंडल बनाने आरंभ कर दिए हैं। बताया जाता है कि अनिल विज मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कोई बड़ा फैसला कर सकते हैं। ऐसे में ठीक उसी तरह की तनातनी बन सकती है, जिस तरह की तनातनी सीआइडी को लेकर पुलिस विभाग में बनी थी। बाद में सीआइडी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने पास रख लिया था। चुनाव के समय को देखते हुए भाजपा हाईकमान किसी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। ऐसे में अनिल विज की नाराजगी दूर करने के सारे प्रयास किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री उस अधिकारी को भी अनिल विज का गुस्सा शांत करने के लिए कह सकते हैं, जिसके द्वारा स्वास्थ्य विभाग की मीटिंग लेने की वजह से ऐसी स्थिति बनी है। इस अधिकारी का कहना है कि उसने दिल्ली के किसी बड़े मंत्री के कहने पर यह मीटिंग ली थी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अनिल विज ने इस संबंध में उसी मंत्री से बात कर ली, जिसके बारे में मुख्यमंत्री कार्यालय के इस अधिकारी द्वारा नाम लिया जा रहा है। बताया जाता है कि भाजपा के संबंधित वरिष्ठ नेता ने साफ कह दिया कि मेरे पास दिल्ली में बहुत काम है। मैं भला हरियाणा के कामकाज में हस्तक्षेप क्यों करूंगा। केंद्रीय नेतृत्व से इस तरह की सूचना मिलने के बाद अनिल विज और ज्यादा तैश में इसलिए आ गए, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि केंद्रीय नेता का नाम लेकर उन्हें गुमराह किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज अब उन विधायकों को भी काम के लिए वापस लौटा रहे हैं, जो स्वास्थ्य विभाग की फाइलें निकलवाने के लिए आ रहे हैं। अनिल विज इन विधायकों से कह रहे हैं कि वे सीएमओ के उसी अधिकारी से काम करवाएं, जिसने मीटिंग ली थी। दूसरी तरफ सीएमओ के इस अधिकारी का कहना है कि वे अपना कोई निजी काम नहीं कर रहे थे। सरकार का कामकाज करना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन फिर भी यदि इससे स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो वे आगे से पूरे सिस्टम का ध्यान रखेंगे। इस पूरे घटनाक्रम में अब अनिल विज के अगले कदम पर सबकी निगाह टिकी हुई है।